यादों का कुसुमन
प्रिय,
यह काव्यांजली मेरे स्वरचित उन गीतों की है जिसमें आपकी यादें आपकी शरारतें आपकी मासूमियत और आपकी कुछ मजबूरियाँ जिसने एक हवा के झोंके को गुलशन की ख़ुशबू देने के बाद सहरा की राह दिखा दी। उसी दर्द-ए-दिल की यादों का कुसुमन आज आपके सामने है जिसमें निश्चय ही अनिल का सूना झोंका अपनी यादों का साज छेड़ता मिलेगा।
– अनिल मिश्र
रमगढ़ा, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत।
